सुपात्र को यथाशक्ति दान अवश्य देना चाहिए—- पंकजा प्रज्ञा दीदीजी श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम तो श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम– पंकजा प्रज्ञा दीदीजी
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भगवत्नाम का सुमिरन करते रहना चाहिए- —-पंकजा प्रज्ञा दीदीजी
सुपात्र को यथाशक्ति दान अवश्य देना चाहिए—- पंकजा प्रज्ञा दीदीजी
श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम तो श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम– पंकजा प्रज्ञा दीदीजी
अवतारवाद का रहस्य लोक धर्म की स्थापना- पंकजा प्रज्ञा दीदी जी

बिलाईगढ——ग्राम लिमतरी विकासखंड बिलाईगढ़ में महिला स्व सहायता समूह के महिलाओं के द्वारा संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया है। कथा के मुख्य श्रोता डॉक्टर मोतीलाल साहू, सेवानिवृत्त गुरुजी बसंतकुमार साहू एवं रथराम साहू ने बताये कि यह कथा दिनांक ०७/०३/ २०२५ शुक्रवार को गीतापाठ, तुलसी वर्षा, हवन, सहस्त्रधारा, पूर्णाहूती के साथ विश्राम लेगी। कथा प्रतिदिन दोपहर लगभग 2:00 बजे से हरी इच्छा तक जारी है। ग्रामवासी लिमतरी एवं कथाव्यास परम पूज्या पंकजा प्रज्ञा दीदीजी ने अधिक से अधिक लोगों को आकर इस कथा से लाभ उठाने के लिए निवेदन किए हैं।
श्रीधाम पोडी( लाफा) जिला कोरबा छत्तीसगढ़ से पधारी हुई परम पूज्या पंकजा और प्रज्ञा दीदीजी ब्यासासीन होकर अपनी सहज सरल सुबोध शैली से साधारण बोलचाल की भाषा में संगीतमयी कथा का गुणगान कर रही है, ताकि कथा को सामान्य जन भी समझ कर हृदय में धारण कर सकें। कथा के चतुर्थ दिवस दिनांक ०३/०३/२०२५ सोमवार को मंगलाचरण, आरती, हरिनाम संकीर्तन के साथ कथा का प्रारंभ किया गया। कथा का शुभारंभ करती हुई कथावाचिका पंकजा दीदीजी ने बताई कि भगवत्नाम प्रभु प्राप्ति का सबसे सहज सरल सुंदर साधन है। कलियुग में हम लोगों से पूजापाठ, यज्ञ, दान, तीर्थ व्रत आदि करने में कई प्रकार की कठिनाई है ।नाम जप कोई भी व्यक्ति किसी भी समय उठते बैठते, खाते पीते ,सोते जागते कर सकता है। इसमें किसी प्रकार के नियम की बंधन नहीं है ।श्रीरामचरितमानस में भी प्रातःस्मरणीय पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदासजी लिखे हैं कि –नहि कलि कर्म न भगति विवेकू। राम नाम अवलंबन एकू।। कलियुग केवल नाम अधारा। सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।। इसलिए हम लोगों को भगवत्नाम का सुमिरन करते रहना चाहिए। भगवत्नाम का सुमिरन ही सबसे बड़ी संपत्ति एवं विस्मरण ही सबसे बड़ी विपत्ति है ।कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई ।जब तव सुमिरन भजन न होई।।
कथावाचिका ने बीच-बीच में सुमधुर स्वर में भजन गाकर श्रोता समाज को नृत्य भी कराई। गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार की कथा को सुनाती हुई बोली कि राजा बलि ने अपने गुरुदेव शुक्राचार्य के मना करने के बाद भी वामन भगवान को दान किया ।इसका तात्पर्य यह है कि सुपात्र को यथाशक्ति दान अवश्य करना चाहिए ।श्रीराम प्रभु ने भी विश्वामित्र मुनि के साथ जनकपुर धनुष यज्ञ में जाते समय ब्राह्मणों को दान दिए। रामचरितमानस में लिखा है कि– तब प्रभु ऋषिन्ह समेत नहाए। विविध दान महिदेवन्ह पाये।। हमारे भारत देश के प्रसिद्ध संत कबीरदासजी ने भी कहे हैं कि– चिडी चोंच भर ले गई, नदी न घटयो नीर। दान दिए धन न घटे कह गये दास कबीर।।
कथावाचिका प्रज्ञा दीदीजी ने आगे सूर्यवंश के राजाओं का इतिहास बताती हुई राजा अंबरीस एवं दुर्वासा जी के प्रसंग का वर्णन की। एकादशी के महिमा के विषय में बताई। एकादशी के दिन कम से कम व्यक्ति को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए ।आगे भगवान राम के चरित्र के प्रमुख प्रमुख प्रसंगो को स्पर्श करती हुई बोली कि राम कथा का द्वार शिवकथा और श्रीकृष्ण कथा का द्वार श्रीराम कथा है। श्रीकृष्ण की लीला प्रेम और माधुर्य से भरी हुई है, जबकि राम की प्रत्येक लीला में मर्यादा है ।जो धर्म की मर्यादा में रहता है उसके मन में ही प्रभु प्रेम जगता है ।तभी तो भागवत में मर्यादा पुरुषोत्तम की कथा पहले आती है और प्रेम पुरुषोत्तम की कथा बाद में आती है ।श्रीराम त्याग और वैराग्य के मूर्ति है। रामो विग्रहवान धर्मः । मोहरूपी रावण का वध करे, अहंकार रूपी कुंभकरण को या तो सुला दे अथवा नष्ट कर दे और काम रुपी मेघनाथ पर विजय प्राप्त करे उसी का हृदय रामराज्य कहलाता है। श्रीकृष्ण प्रेमरस के स्वरूप है। श्रीकृष्ण नर रूप धारण करके प्रेम रस का दान करते हैं ।गोपियों का मन सदैव कृष्ण में आसक्त रहता है। इसी से गोपियों की सहज समाधि है, और परमहंस शुकदेवजी गोपियों की कथा का बखान करते हैं। शुकदेवजी सन्यासी महापुरुषों के आचार्य हैं पर गोपियों की प्रशंसा करते हैं। गोपियों का वस्त्र संन्यास नहीं है। गोपियों का प्रेम सन्यास है ।वस्त्र संन्यास से प्रेम सन्यास श्रेष्ठ है। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा है पर गोपियों के मन में घर नहीं है ।गोपियों के मनमें श्रीकृष्ण का स्वरूप स्थिर है। गोपियां नाक नहीं पकड़ती, प्राणायाम नहीं करती फिर भी सहज समाधि है। श्रीकृष्ण लीला में इंद्रियों को सहज समाधि की ओर ले जाकर परमानंद की अनुभूति कराने के लिए ही भगवान नर रूप से गोकुल में प्रकट होते हैं ।गोपियां बधाई देती हुई गाती है –नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ।और बृजवासी गाते हैं नंदजी के अंगना में बज रही आज बधाई।।
ग्राम लिमतरी में कथा श्रवण करने के लिए आसपास के गांव दर्री, बरेली, नरधा,तौलीडीह, नवापारा, पुरगांव से हजारों की संख्या में लोगबाग आकर इस कथा से लाभ उठा रहे हैं। कथा वाचिका के कथा से आसपास के गांव सहित लिमतरी में भक्ति एवं शांति का वातावरण निर्मित हो गया है। लोगबाग आपस में परम पूज्या पंकजा प्रज्ञा दीदीजी के कथाओं का ही चर्चा कर रहे हैं।

