CMO को 112 डायल कर बुलानी पड़ी पुलिस SDM दहसीलदार सहित पूरी टीम पर कार्यवाही करने थाना प्रभारी से FIR की गुहार
CG PUBLIC TIMES
*बिलाईगढ़ में प्रशासनिक तानाशाही*
**नगर की विकास रोकने और भ्रष्टाचार दबाने के लिए CMO निवास पर घुसी SDM की टीम*
*SDM का इशारे पर तहसीलदार की दादागिरी*
*CMO को 112 डायल कर बुलानी पड़ी पुलिस SDM दहसीलदार सहित पूरी टीम पर कार्यवाही करने थाना प्रभारी से FIR की गुहार*
ताज़ा मामला सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के नगर पंचायत बिलाईगढ़ का प्रशासनिक मर्यादा, जनहित और शासकीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला एक बड़ा राजनीतिक-प्रशासनिक षड़यंत्र उजागर हुआ है। नगर पंचायत बिलाईगढ़ के नवपदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) यशवंत देवांगन के निवास में 7 सितंबर 2026 की शाम 6:01 बजे तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल, नायब तहसीलदार देवराज सिदार, पटवारी प्रमोद तांडे, कंप्यूटर ऑपरेटर यशवंत पटेल तथा भृत्य कुमारी बाई कुर्रे दल-बल के साथ बिना किसी अनुमति बलपूर्वक और हिंसक रवैये के साथ ज़बरदस्ती घुस गए। इस पूरी अनाधिकृत व हिंसक कार्रवाई के मुख्य सूत्रधार SDM प्रफुल्ल रजक स्वयं CMO के निवास के बाहर खड़े होकर निगरानी कर रहे थे। और SDM के इशारे पर पूरी टीम को घर के भीतर भेजकर धमकाने व दबाव बनाने का खेल रचा गया। पूर्व CMO के 50 लाख के गबन की जाँच दबाने और नए विकास कार्यों को रोकने की साज़िश
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की मुख्य वजह नगर पंचायत बिलाईगढ़ में व्याप्त भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की राजनीति है। बिलाईगढ़ के पूर्व विवादित CMO सुशील चौधरी के कार्यकाल में पूरा विकास कार्य ठप्प पड़ा हुआ था। वे शासकीय दायित्वों को छोड़कर राजनीति में ज़्यादा सक्रिय रहते थे, जिसके कारण क्षेत्र का विकास पूरी तरह से रुक गया था। सुशील चौधरी पर लगभग 50 लाख रुपये के वित्तीय गबन का गंभीर आरोप है। इस गबन की जाँच के आदेश स्वयं कलेक्टर द्वारा दिए गए थे। जाँच का प्रभार तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल को सौंपा गया था। किंतु अचरज की बात है कि तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल ने आज तक इस बड़े भ्रष्टाचार की जाँच को आगे नहीं बढ़ाया। जब बिलाईगढ़ के सर्व समाज ने बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कई दिनों तक उग्र हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया, तब जाकर शासन ने नए CMO यशवंत देवांगन को बिलाईगढ़ भेजा।
*नगर में सड़क-गली का निर्माण शुरू होते ही तिलमिलाया प्रशासन*
नव पदस्थ CMO यशवंत देवांगन ने पदभार सँभालते ही बिलाईगढ़ की जर्जर गलियों, बदहाल सड़कों और ठप्प पड़े विकास कार्यों का निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू कराया। लेकिन बिलाईगढ़ का विकास और भ्रष्टाचार का उजागर होना एसडीएम और तहसीलदार को रास नहीं आ रहा है। आरोप है कि एसडीएम व तहसीलदार लगातार नए CMO पर दबाव बना रहे थे कि “तुम्हें यहाँ सड़क और गली बनवाने की कोई ज़रूरत नहीं है।” चर्चा यह भी आम है कि SDM प्रफुल्ल रजक विवादित पूर्व CMO सुशील चौधरी को वापस बिलाईगढ़ लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि तत्कालिक सीएमओ सुशील चौधरी का पदस्थापना सितंबर 2024 से अगस्त 2026 स्थानांतरण के मध्य CMO निवास को कार्यालय बनाकर पूरे विभाग के दस्तावेजों को लाकर कार्यालयीन कार्यों का संचालन किया करता था उपरोक्त अवधि में सीएमओ सुशील चौधरी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रतिदिन महिला कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, नेताओं तथा असामाजिक तत्त्वों के साथ मिलकर षडयंत्र पूर्वक फर्जी कूटरचना दस्तावेज तैयार कर चिन्हांकित कर्मचारियों, नगरवासियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित किया जा रहा था साथ ही प्रतिदिन महिला कर्मचारियों, महिला नेताओं के साथ देर रात तक गुप्त मीटिंग एवं भ्रमण किया करता था। स्वच्छता प्रेरणा समूह के दीदियों के साथ अभद्रता अश्लीलता करते हुए कार्य से पृथक कर दिया गया इतना ही नहीं फर्जी बिल भुगतान, फर्जी कार्यवाही, फर्जी आहरण, पार्षद निधियों का नियम विरुद्ध कार्य जैसे बड़े बड़े भ्रष्टाचार किया गया। जिसकी शिकायत तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर से लेकर मंत्रालय तक की गई थी। किंतु सीएमओ निवास से महज पचास मीटर की दूरी पर एसडीएम, तहसीलदार आर आई, पटवारी और नायब तहसीलदार सहित तमाम कार्यालय होने के बावजूद इन 23 महीना में कोई भी अधिकारी न झांकने आए न ही टीम गठित किया और न ही कोई कार्यवाही हुई। सवाल यह है कि अब ऐसी क्या स्थिति उत्पन्न हो रही है की अधिकारियों को कार्यालयीन समय को छोड़कर मुख्य नगर पालिका अधिकारी के निवास में बिना अनुमति के दबिश देना पड़ रहा है क्या सत्ता पक्ष के किसी बड़े राजनीतिक नेताओं का दबाव है या फिर सीएमओ सुशील चौधरी के द्वारा अपने वापसी को लेकर उनके चहेतों के द्वारा उक्त कृत्य कराया जा रहा है।
विकास कार्यों को रुकवाने और दबाव बनाने की नीयत से एसडीएम के शह पर तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल व उनकी टीम द्वारा 7 सितम्बर 2026 को शाम 6:01 बजे CMO देवांगन के घर में घुसी। अधिकारियों ने घर में प्रवेश करते ही वीडियो बनाना शुरू किया और वहाँ मौजूद पार्षदों (नरेश देवांगन, उमाशंकर देवांगन, सौभाग्य शरण सिंह, घसिया यादव) के सामने ही पार्षदों को तुम कौन हो क्या करने आए हो करके धमकाने लगी और CMO को धमकाना व उनके शासकीय-निजी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया।
शासन के आदेश से स्थानांतरित होकर आए CMO को लिखित आदेश दिए बिना जॉइनिंग से रोका जा रहा था और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। एसडीएम तहसीलदार के द्वारा बोला जा रहा की हमारे हिसाब से काम करो नहीं तो सस्पेंड करवा देंगे। इसी प्रकार कलेक्टर के द्वारा भी टी एल मीटिंग के दौरान चपरासी हो क्या तुम ऐसे बोलकर पद के अनुरूप न बोलकर बेइज्जत अपमानित किया जा रहा है। आरोप है कि जब से नया सीएमओ पदभार संभाला है तब से निवास में प्रतिदिन 5/7 लोग अनाधिकृत रूप से घर अन्दर घुस कर धमकाया जा रहा है ऑफिस समय खत्म होने के बाद पारिवारिक माहौल में इस प्रकार की गुंडागर्दी से क्षुब्ध होकर CMO को तत्काल 112 डायल कर पुलिस बुलानी पड़ी। दोषियों पर FIR और सुरक्षा की माँग।

एक तरफ जहाँ बिलाईगढ़ की जनता सड़कों और विकास के लिए तरस रही थी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन विकास कार्य करने वाले अधिकारी को दबाने और 50 लाख के गबन के आरोपी को संरक्षण देने में जुटा है। यह घटना दर्शाती है कि बिलाईगढ़ में किस कदर प्रशासनिक तानाशाही हावी है। पीड़ित CMO यशवंत देवांगन ने थाना प्रभारी बिलाईगढ़ से SDM प्रफुल्ल रजक, तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल सहित घुसपैठ करने वाले तमाम कर्मचारियों पर कड़ी धाराओं में नामजद FIR दर्ज करने और अपने निवास व जीवन की तत्काल सुरक्षा प्रदान करने की गुहार लगाई है।

